नई दिल्ली, 06 अक्टूबर । उच्चतम न्यायालय ने लॉ की पढ़ाई करने वाले छात्रों को कम उपस्थिति के आधार पर परीक्षा देने से नहीं रोकने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) और विभिन्न लॉ कॉलेजों का पक्ष सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा।
03 नवंबर 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि किसी भी लॉ पढ़ने वाले छात्रों को कम उपस्थिति के आधार पर परीक्षा देने से नहीं रोका जाएगा। उच्च न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को अनिवार्य उपस्थिति नियमों में संशोधन का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय के इस आदेश को नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज और बीसीआई ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।
उच्चतम न्यायालय ने 13 मई को दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा था कि अगर उपस्थिति को लेकर सख्त रुख नहीं अपनाया गया तो लॉ कॉलेज केवल बोर्डिंग और लॉजिंग जैसी जगह बनकर रह जाएंगे।
उच्च न्यायालय साल 2016 में एमिटी यूनिवर्सिटी के एक लॉ छात्र सुशांत रोहिल्ला के खुदकुशी के मामले पर सुनवाई कर रहा था। सुशांत लॉ के थर्ड ईयर का छात्र था और उसे परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया था। उसने 10 अगस्त 2016 को अपने घर में ही खुदकुशी कर ली थी। सुशांत के दोस्त की चिट्ठी पर उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में संज्ञान लिया था।