राजस्थान के एनसीआर क्षेत्र में ग्रीन पटाखों पर सख्ती, 20 नवंबर तक निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध

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जयपुर, 04 नवंबर । दीपावली के दौरान वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए राजस्थान सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सख्ती बढ़ा दी है। राज्य के एनसीआर क्षेत्र में शामिल पांच जिलों में केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति होगी। पटाखे भी 7 और 8 नवंबर को निर्धारित समय पर ही चलाए जा सकेंगे। इसके अलावा, 5 से 20 नवंबर तक धूल उत्पन्न करने वाली निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक में संबंधित विभागों को इन निर्देशों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना में जारी निर्देशों के अनुसार, अलवर, भरतपुर, डीग, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिलों के एनसीआर क्षेत्र में केवल सीएसआईआर-नीरी से प्रमाणित ग्रीन पटाखों के उपयोग की अनुमति होगी। निर्धारित व्यवस्था के तहत 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे तथा रात 8 से 10 बजे तक ही पटाखे चलाए जा सकेंगे। इन निर्धारित समयावधियों के अलावा पटाखे चलाने पर प्रतिबंध रहेगा।

अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और शैक्षणिक संस्थानों को शांत क्षेत्र घोषित किया गया है। इन संस्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के आदेशों के तहत एनसीआर क्षेत्र में 5 से 20 नवंबर तक धूल उत्पन्न करने वाली विध्वंस गतिविधियों और खुले में की जाने वाली निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। हालांकि, रेलवे, मेट्रो, हवाई अड्डों, अंतरराज्यीय बस टर्मिनलों, अस्पतालों, जलापूर्ति, स्वच्छता, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को निर्धारित छूट दी गई है। वहीं, राजमार्ग, सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, बिजली पारेषण, पाइपलाइन और दूरसंचार जैसी सार्वजनिक परियोजनाओं से जुड़ी रैखिक गतिविधियां भी प्रतिबंध के दायरे में रहेंगी।

मुख्य सचिव ने निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के प्रबंधन की नियमित निगरानी के लिए डैशबोर्ड का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़कों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए यांत्रिक सफाई मशीनों का अधिकतम उपयोग करने और उनका संचालन दो पालियों में सुनिश्चित करने को कहा। इसके साथ ही यातायात का दबाव कम करने, प्रमुख मार्गों पर आवागमन सुगम बनाने तथा पेट्रोल पंपों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली स्थापित करने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि परिवहन विभाग ने एनसीआर क्षेत्र में वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र के बिना चल रहे पांच हजार से अधिक वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की है। यह कार्रवाई ‘प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र नहीं तो ईंधन नहीं’ व्यवस्था के तहत की गई है।

सरकार का उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाने के साथ क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार करना है।

बैठक में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अध्यक्ष अपर्णा अरोड़ा, वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार, नगरीय विकास एवं आवासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक गुप्ता, पुलिस महानिदेशक यातायात मालिनी अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों को निर्देशों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करने और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उपायों की नियमित निगरानी करने को कहा गया।