महिषी में दो सौ साल पुराना अति दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपि चिन्हित,ज्ञान भारतम पोर्टल पर किया अपलोड

Spread the love

सहरसा, 03 मई । ज्ञान भारतम परियोजना के तहत संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा देश भर में बौद्धिक संपदा को संकलित करने के उद्देश्य से अति प्राचीन पांडुलिपियों की जानकारी संग्रहित की जा रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार व जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा झा कल देर शाम महिषी स्थित स्वर्गीय सदाशिव चौधरी उर्फ बाबू साहेब के पुश्तैनी आवास पर पांडुलिपि से संबंधित जानकारी के लिए पहुंची।

आज पांडुलिपि सर्वेक्षण के दौरान श्रीमती उषा चौधरी पति स्वर्गीय सदाशिव चौधरी, महिषी द्वारा पांडुलिपियां उपलब्ध कराई गई और पोर्टल पे अपलोड भी कर दिया गया। साथ में आनंद दत्त झा और अमित आनंद का भी सहयोग रहा । इन पांडुलिपियों में सबसे खास बात ये रही कि ये दुर्लभ हैं क्योंकि इनका समय आज से लगभग 150-200 साल का माना जा रहा है।पांडुलिपि सर्वेक्षण दल के प्रमुख सदस्य डॉ आनंद दत्त झा जो श्री उग्रतारा भारती मंडन संस्कृत महाविद्यालय में वेद संकाय के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और प्राचीन लिपि व मैन्युस्क्रिप्ट के विशेष जानकार भी हैं ने जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा झा के साथ गृहस्वामी उषा चौधरी और बबीता चौधरी के साथ मिल कर अति प्राचीन पांडुलिपियों और अति प्राचीन दस्तावेजों का गहन अध्ययन किया जिसे तत्क्षण ही ज्ञान भारतम पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया।

श्रीमती स्नेहा ने बताया गया कि श्रीमती उषा चौधरी के आवास में पड़े संदूक में 150 से 200 वर्ष तक दस्तावेज प्राप्त हुए हैं जो विभिन्न श्रेणियों में संग्रहित की जा सकती है। एक पांडुलिपि के रूप में और दूसरा अभिलेख के रूप में आर्काइव में रखी जा सकती है।विदित हो कि स्वर्गीय सदाशिव चौधरी के पिता बलभद्र चौधरी अंग्रेजी हुकूमत और मधुबनी एस्टेट के आधिकारिक तहसीलदार थे। 1850 ईस्वी तक के अभिलेख अंग्रेजी लिखी हुई इंग्लैंड, लंदन के पता अंकित और मोहर लगी हुई मिली हुई है और कुछ तस्तावेज हस्तलिखित और प्रिंट रूप में उर्दू में भी मिली है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि एक ही बंद कमरे से यह प्राप्त हुआ है और कई कमरे हैं जिनसे और भी अनेकों पांडुलिपि और अभिलेखाकार के लिए दस्तावेज मिल सकती है जो आने वाली पीढ़ी के एक वरदान होगा।