देहरादून, 22 अगस्त । उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हुआ है। प्रदेश में पिछले पांच वर्षों में 221 ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिनमें 84 फास्ट और 137 स्लो चार्जर शामिल हैं। परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने शनिवार को यह जानकारी दी।
प्रदीप बत्रा ने बताया कि केंद्र सरकार की फेम-2 योजना के तहत राज्य में 61 अतिरिक्त चार्जिंग यूनिट भी स्थापित की गई हैं। उनके अनुसार ईवी चार्जिंग बुनियादी ढांचे के मामले में उत्तराखंड अन्य हिमालयी राज्यों से आगे है। जम्मू-कश्मीर में 180, हिमाचल प्रदेश में 133, मेघालय में 62, मणिपुर में 58,त्रिपुरा में 55,सिक्किम में 12 और लद्दाख में एक चार्जिंग स्टेशन स्थापित है।
मंत्री बत्रा ने बताया कि प्रदेश में पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़कर 1.04 लाख हो गई है। पिछले तीन वर्षों में ही 58 हजार से अधिक ईवी पंजीकृत हुए हैं। बढ़ती संख्या को देखते हुए चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का विशेष जोर चारधाम यात्रा और प्रमुख पर्यटन मार्गों पर फास्ट चार्जिंग नेटवर्क मजबूत करने पर है। इसके साथ ही चार्जिंग स्टेशनों के लिए पर्याप्त विद्युत लोड उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
परिवहन मंत्री ने बताया कि ईवी के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बिजली की मांग में भी वृद्धि का अनुमान है। वर्तमान में ईवी से संबंधित बिजली खपत करीब 15.7 लाख यूनिट सालाना है, जो वर्ष 2025-26 में 23.6 लाख यूनिट, 2026-27 में 74.4 लाख यूनिट और 2027-28 में 234.8 लाख यूनिट तक पहुंचने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण पर भी जोर दे रही है। परिवहन निगम की बसों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक किया जा रहा है और पुरानी बसों को भी इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से प्रदूषण और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार के साथ उत्तराखंड में स्वच्छ और हरित परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना है।
—-