कानपुर, 01 अक्टूबर । आज के आधुनिक दौर में युवाओं के लिए अपनी जड़ों और भारतीय संस्कृति की गहरी समझ विकसित करना जरूरी है। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा जैसे आयोजन छात्रों के बौद्धिक विकास के साथ उनकी भाव संवेदना और आध्यात्मिक चेतना को भी परिष्कृत करने में सहायक हैं। ऐसे प्रयास युवाओं को राष्ट्र और चरित्र निर्माण की दिशा में प्रेरित कर सकते हैं। यह बातें गुरुवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्विद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के आयोजन पर कहीं।
सीएसजेएमयू में अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार की ओर से भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा आयोजित की गई। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के 250 से अधिक छात्र-छात्राओं ने ओएमआर शीट के माध्यम से हुई परीक्षा में हिस्सा लिया। परीक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना, मानवीय गरिमा और नैतिक मूल्यों के प्रति समझ विकसित करना रहा।
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. दिवाकर अवस्थी ने बताया कि अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से यह परीक्षा वर्ष 1994 से लगातार आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को सकारात्मक सोच विकसित करने के साथ तनाव और दुर्व्यसनों से दूर रहने के लिए प्रेरित करते हैं। विश्वविद्यालय में ऐसे कार्यक्रमों से छात्रों में कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र गौरव की भावना को भी मजबूती मिलती है।
पत्रकारिता विभाग के परीक्षा संयोजक डॉ. हरिओम कुमार ने बताया कि परीक्षा का संचालन व्यवस्थित और निष्पक्ष तरीके से किया गया। ओएमआर शीट आधारित परीक्षा के लिए छात्रों को पहले ही अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई थी। विभिन्न विभागों के समन्वय से परीक्षा केंद्रों पर शांतिपूर्ण माहौल में परीक्षा संपन्न कराई गई।
परीक्षा के आयोजन में विभिन्न संकायों के शिक्षकों ने भी सहयोग किया। फाइन आर्ट विभाग से डॉ. मंतोष यादव, कृषि विज्ञान विभाग से डॉ. अभिषेक, दीनदयाल शोध केंद्र से डॉ. श्रवण द्विवेदी और योग विज्ञान विभाग से डॉ. राम किशोर ने व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परीक्षा के दौरान व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने और परीक्षार्थियों का उत्साह बढ़ाने के लिए भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के जिला संयोजक सुरेश जोशी, लक्ष्मी नारायण कुशवाहा, उमेश कटियार और राजेन्द्र श्रीवास्तव विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर मौजूद रहे।