पश्चिम एशिया में संघर्ष के मद्देनजर भारतीय नौसेना ने परखीं अपनी समुद्री तैयारियां

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नई दिल्ली, 17 अप्रैल । पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच मौजूदा ऑपरेशनल माहौल में भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री तैयारियों का आकलन किया है। नौसेना कमांडरों ने चार दिन तक नई दिल्ली में परिचालन और सामग्री तैयारी, बुनियादी ढांचा, रसद और मानव संसाधन के मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया। बदलते भू-रणनीतिक माहौल को देखते हुए नौसेना प्रमुख ने समुद्री सुरक्षा में बढ़ती मुश्किलों पर जोर दिया। चीफ ऑफ द डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) और केंद्रीय गृह सचिव ने भी कॉन्फ्रेंस के दौरान नौसेना कमांडरों से बातचीत की।

साल में दो बार होने वाले नौसेना कमांडरों के सम्मेलन का पहला चरण शुक्रवार को नई दिल्ली में समाप्त हो गया। नौसेना मुख्यालय में शीर्ष नेतृत्व की 14-17 अप्रैल तक चली यह कॉन्फ्रेंस काफी महत्वपूर्ण रही। विचार-विमर्श के साथ ही नौसेना की ऑपरेशनल और मटेरियल की तैयारी, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और ह्यूमन रिसोर्स की समीक्षा हुई। नौसेना के कमांडरों ने इस फोरम का इस्तेमाल पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच अपनी ऑपरेशनल क्षमता का आकलन करके किया।

नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी के उद्घाटन भाषण के साथ कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई। उन्होंने बदलते जियो स्ट्रेटेजिक माहौल पर जोर देते हुए समुद्री सुरक्षा में बढ़ती मुश्किलों का उल्लेख किया, जहां एक साथ होने वाले संघर्ष, कमजोर होते नियम-आधारित सिस्टम और नॉन-स्टेट एक्टर्स से बढ़ते खतरे नौसेना के लिए बहुत ज्यादा विवादित ऑपरेशनल जगह बना रहे हैं। उन्होंने लड़ाई की तैयारी पर लगातार ध्यान देने और भविष्य के लिए तैयार फोर्स बनाने के लिए नई टेक्नोलॉजी अपनाने की जरूरत पर जोर दिया।

नौसेना प्रमुख ने उभरते भू-रणनीतिक माहौल में हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की जिम्मेदारियों को भी दोहराया और बहुपक्षीय और द्विपक्षीय अभ्यास अभ्यासों में मित्र देशों के साथ मजबूत और भरोसेमंद तरीके की जरूरत पर जोर दिया। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कॉन्फ्रेंस के दौरान नौसेना कमांडरों से बातचीत की। सीडीएस ने बदलते जियो पॉलिटिकल सिस्टम पर जोर दिया और नौसेना से युद्ध के तेजी से बदलते माहौल में इसके आर्थिक और तकनीकी पहलू के लिए तैयार रहने को कहा। केंद्रीय गृह सचिव ने मजबूत तटीय सुरक्षा बनाए रखने और गैर-कानूनी गतिविधियों से निपटने के लिए अर्धसैनिक बलों के बीच लगातार मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया।

नौसेना प्रमुख ने कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय नौसेना समुद्री सुरक्षा रणनीति को दूसरे जरूरी नौसेना प्रकाशन के साथ रिलीज किया। डिफेंस फोर्सेज विजन 2047 और इंडियन नेवी विजन 2047 पर आधारित यह नीति आने वाले दशक में बदलते सिक्योरिटी माहौल में महत्वपूर्ण होगी। यह रणनीति बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य, विघटनकारी प्रौद्योगिकी, उच्च रक्षा संगठन में सुधार और युद्ध के बदलते स्वरूप के यथार्थवादी मूल्यांकन पर आधारित है। कॉन्फ्रेंस के दौरान नौसेना प्रमुख ने सागर मंथन को भी होस्ट किया। इस फोरम ने नौसेना के शीर्ष नेतृत्व के बीच भागीदारी के जरिए कई महत्वपूर्ण चर्चाओं को आसान बनाया।