जयपुर, 23 सितंबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने पति की मौत के बाद उसके स्थान पर अनुकंपा नौकरी पर लगी बहू के वेतन से हर माह 25 फीसदी राशि उसकी सास के बैंक खाते में जमा कराने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने टर्मिनल बेनेफिट की आधी राशि भी सास को अदा करने को कहा है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश कमली देवी व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा की अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले व्यक्ति पर परिवार के अन्य आश्रितों के हितों की रक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। मृत कर्मचारी के आश्रित को मिली अनुकंपा नियुक्ति केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं है। ऐसी नियुक्ति को केवल व्यक्तिगत रोजगार लाभ के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि मृत कर्मचारी के आश्रित परिवार की आर्थिक सुरक्षा इसका मूल उद्देश्य है।
याचिका में अधिवक्ता रमित पारीक ने बताया कि याचिकाकर्ता का बेटा सुभाष चन्द्र एवीवीएनएल में टेक्निकल हेल्पर पद पर था। इस दौरान मार्च, 2017 में उसकी मौत हो गई। बेटे की मौत के बाद सास-ससुर की एनओसी मिलने पर बहू ममता को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। नौकरी के समय बहू ने परिवार के अन्य सदस्यों की देखभाल और भरण पोषण का शपथ पत्र दिया था, लेकिन कुछ समय बाद ही बहू ने ससुराल छोड दिया और दूसरी शादी कर ली। इसके साथ ही आर्थिक सहारा देना भी बंद कर दिया। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि बहु ममता रानी को अनुकंपा नियुक्ति दिलवाने के पीछे उद्देश्य था कि वह परिवार के अन्य सदस्यों का भरण-पोषण करेगी। इसलिए उन्हें बहू को मिलने वाले वेतन का एक हिस्सा नियमित तौर पर दिया जाए। वहीं मृत बेटे के टर्मिनल बेनेफिट्स भी दिलवाए जाए। जिसका विरोध करते हुए बहू की ओर से कहा गया की उसके साथ याचिकाकर्ता उचित व्यवहार नहीं करते और याचिकाकर्ता के दूसरे बेटे उसका भरण पोषण करते हैं। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने बहू के वेतन से हर महीने 25 फीसदी राशि सास को देने के आदेश दिए हैं।