बिलासपुर, 23 अप्रैल । छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने निलंबित कलेक्टर आईएएस रानू साहू के रिश्तेदारों की करोड़ों की संपत्ति अटैच किए जाने के विरूद्ध पेश कुल 9 याचिकाओं को खारिज कर दी है।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि भविष्य में आरोपित निर्दोष साबित होते हैं, तो वे धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 8(8) के तहत अपनी संपत्तियों की वापसी के लिए कानूनी रास्ता अपना सकते हैं। मामले में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डबल बेंच में बुधवार को सुनवाई हुई।
कोल लेवी वसूली व मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी ने रानू साहू के रिश्तेदारों तुषार साहू, पंकज कुमार साहू, पीयूष कुमार साहू, पूनम साहू, अरुण कुमार साहू, लक्ष्मी साहू, सहलिनी साहू और रेवती साहू की सम्पत्ति अटैच की है। इस कार्रवाई के खिलाफ सभी ने अलग-अलग याचिका पेश की थी। याचिका में कहा गया है कि ईडी ने रानू साहू के कोरबा कलेक्टर रहने से पूर्व में खरीदी गई संपत्ति को अटैच किया है। अपीलेट ट्रिब्यूनल से अपील खारिज की गई है, जो गलत है। इसके अलावा एफआईआर में उनका नाम नहीं है। अटैच प्रॉपर्टी को मुक्त कराने की मांग की गई।
ईडी ने अदालत को बताया कि संबंधित सभी लोगों ने अपनी आय का वैध स्रोत स्पष्ट नहीं किया। एजेंसी के अनुसार, राज्य में कोयला परिवहन के नाम पर प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली का सिंडिकेट सक्रिय था। मामले में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डबल बेंच ने सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा कि जुर्म से पहले खरीदी गई प्रॉपर्टी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपने आप अटैचमेंट से सुरक्षित नहीं होती है। सेक्शन 2(1)(यू ) के तहत “जुर्म से हुई कमाई” की परिभाषा में न सिर्फ खराब प्रॉपर्टी शामिल है, बल्कि उसकी बराबर कीमत भी शामिल है। जो एक बड़े कानूनी इरादे को दिखाता है। अदालत ने माना कि “अपराध की आय” का अर्थ केवल अपराध से मिली सीधी नकदी नहीं है। यदि वह राशि उपलब्ध नहीं है, तो उसके बराबर मूल्य की अन्य संपत्तियां (भले ही वे अपराध से पहले खरीद की गई हों) कुर्क की जा सकती हैं।
अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता अपनी संपत्तियों के लिए धन के स्रोत का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके, जो उनकी ज्ञात आय से अधिक प्रतीत होती है।ऐसी अटैचमेंट का मकसद अपराधियों को जुर्म से होने वाले आर्थिक फ़ायदों को अपने पास रखने से रोकना है। एनफोर्समेंट अथॉरिटी के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह सीधे सबूतों से यह साबित करे कि जिस प्रॉपर्टी की बात हो रही है, वह अपराध से हुई कमाई है। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में काम करने का तरीका अक्सर घुमावदार और साफ न दिखने वाले फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन से जुड़ा होता है, जिससे सीधे सबूत मिलना मुश्किल हो जाता है। इसके साथ अदालत ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सबसे पहले इन संपत्तियों को 2023 के मध्य में अस्थाई रूप से कुर्क किया था। इसके बाद, संपत्ति कुर्की के आदेश को सक्षम प्राधिकारी ने अक्टूबर 2023 में अपनी मंजूरी दी थी। रानू साहू और उनके परिजनों ने ईडी की इस कार्रवाई और उसके बाद अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेशों को चुनौती देते हुए 2024 और 2025 के दौरान उच्च न्यायालय में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं।
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