डूसू चुनाव के बाद विजय जुलूस पर रोक के आदेश का पालन नहीं करने पर डीयू को हाई कोर्ट का नोटिस

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नई दिल्ली, 23 सितंबर । दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के चुनाव परिणाम के बाद विजय जुलूस नहीं निकालने के उसके आदेश का पालन नहीं करने पर दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पूछा है कि उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही क्यों नहीं शुरु की जाए।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने कहा कि इस साल के चुनाव में सार्वजनिक संपत्तियों का विरुपण देखने को नहीं मिला, ये एक बड़ी उपलब्धि है। उच्च न्यायालय ने डूसू चुनाव के उम्मीदवारों से पूछा कि आपसे लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों पर अमल नहीं करने पर चुनावी नुकसान की भरपाई क्यों नहीं की जाए।

वकील प्रशांत मनचंदा ने दिल्ली उच्च न्यायालय में नयी अर्जी दाखिल कर कहा है कि उच्च न्यायालय के 17 सितंबर के आदेश का उल्लंघन करते हुए 19 सितंबर को दिल्ली यूनिवर्सिटी ओर दूसरी जगहों पर जीते हुए उम्मीदवारों ने विजय जुलूस निकाला। उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को उच्च न्यायालय ने डूसू चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद विजय जुलूस निकालने पर रोक लगाने का आदेश दिया था।

उच्च न्यायालय ने डूसू चुनाव परिणाम आने के बाद दिल्ली में जीत का कोई भी जुलूस निकालने पर रोक लगा दी थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि हम डूसू चुनाव में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं, लेकिन अगर चुनाव संतोषजनक तरीके से संपन्न नहीं कराए गए, तो हम पदाधिकारियों का काम रोक सकते हैं।

कोर्ट ने 15 सितंबर को चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को चेतावनी दी थी कि अगर नियमों और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया, तो अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि डूसू के चुनाव में छात्र संगठनों की बड़ी भूमिका है। कोर्ट ने छात्र संगठनों के पदाधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे अपने उम्मीदवारों को निर्देश दें कि वो नियमों का पालन करें।