चित्रकूट की बाढ़ में मानवता की मिसाल बने सामाजिक कार्यकर्ता, दुर्गम वन क्षेत्रों तक पहुंचाई राहत

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सतना, 2 सितंबर । मध्य प्रदेश के चित्रकूट क्षेत्र में मंदाकिनी नदी की बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। बाढ़ का सबसे अधिक असर वन क्षेत्रों और दूरदराज इलाकों में रहने वाले वनवासी परिवारों तथा साधु-संतों पर पड़ा है। ऐसे संकट के समय सामाजिक कार्यकर्ता राहत और बचाव अभियान चलाकर प्रभावित लोगों तक आवश्यक सामग्री पहुंचा रहे हैं।

मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण जंगलों में स्थित कई कच्ची कुटियाएं और आश्रम भी प्रभावित हुए हैं। अनेक परिवारों के घरों में रखा राशन और दैनिक उपयोग का सामान पानी में बह गया। इसके चलते प्रभावित लोगों के सामने भोजन और जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है।

स्थिति को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दुर्गम वन क्षेत्रों तक पहुंचकर राहत सामग्री वितरण शुरू किया है। कार्यकर्ताओं की टीम अब तक 100 से अधिक वनवासी परिवारों, साधु-संतों और अन्य जरूरतमंद लोगों तक राशन, खाद्य सामग्री तथा आवश्यक दवाइयां पहुंचा चुकी है।

जरूरत के अनुसार बढ़ाया जाएगा राहत अभियान

राहत दल द्वारा प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और लोगों की जरूरतों का लगातार आकलन किया जा रहा है। आवश्यकतानुसार अभियान का दायरा बढ़ाकर अधिक से अधिक प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने की तैयारी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि आपदा की इस घड़ी में जरूरतमंदों की मदद के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

इस राहत एवं जीवन रक्षा अभियान में राकेश प्रताप सिंह, विभाग संयोजक बजरंग दल सतना, लक्ष्मीकांत द्विवेदी, प्रसन्न मिश्रा सहित 15 से अधिक सहयोगी और स्वयंसेवी सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। टीम दुर्गम वन क्षेत्रों में पहुंचकर प्रभावित साधु-संतों और वनवासी परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रही है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उनका प्रयास है कि कोई भी जरूरतमंद परिवार भोजन, दवा अथवा अन्य आवश्यक सामग्री के अभाव में न रहे। राहत अभियान आगे भी जरूरत के मुताबिक जारी रखा जाएगा और प्रभावित लोगों तक हर संभव सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।