नई दिल्ली, 03 सितंबर । उच्चतम न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे वकीलों के साथ कथित मारपीट के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। गुरुवार को वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस मामले को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन करते हुए कहा कि इस घटना की स्वतंत्र जांच जरुरी है। इस पर उच्चतम न्यायालय ने इस मामले पर तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उच्च न्यायालय जाने को कहा।
प्रशांत भूषण ने कहा कि वकील बार काउंसिल ऑफ इंडिया में सुधारों की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन से पहले वकीलों की ओर से एक प्रतिवेदन सौंपा गया था। इसके बाद कुछ लोगों ने खुद को वकील बताते हुए प्रदर्शनकारी वकीलों के साथ कथित तौर पर मारपीट की। प्रशांत भूषण ने कहा कि वकीलों के साथ कथित तौर पर मारपीट की घटना बीसीआई परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में भी रिकार्ड हुई है। प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि इस घटना के बाद बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने एक बयान जारी किया था, जिसमें प्रदर्शनकारी वकीलों को लीगल काकरोच कहा गया और उनके साथ कथित मारपीट को लेकर गर्व जताया गया।
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने वकीलों की ओर से प्रदर्शन के तरीके पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि वकील एक अनुशासित वर्ग का हिस्सा होते हैं और शिकायतों के समाधान के लिए संस्थागत तंत्र का उपयोग किया जाना चाहिए। न्यायिक व्यवस्था के अधिकारी के रुप में वकीलों से अपेक्षा की जाती है कि वे उच्चतम न्यायालय के निर्धारित मानकों और प्रक्रियाओं का पालन करें न कि सार्वजनिक प्रदर्शन का सहारा लेना चाहिए।