राजपिता रमित जी के सान्निध्य में मानव एकता, प्रेम, सेवा और करुणा का संदेश दिया जाएगा।
सेवा
स्थल का उद्घाटन निरंकारी राजपिता रमित जी ने किया। इस अवसर पर मिशन की कार्यकारिणी
समिति, केंद्रीय सेवादल के अधिकारी और हजारों श्रद्धालुओं ने सेवा में हिस्सा लिया।
संत निरंकारी मंडल की अध्यक्ष राजकुमारी मामी जी और सचिव जोगिन्दर सुखीजा ने पुष्पगुच्छ
भेंट कर निरंकारी राजपिता जी का स्वागत किया।
निरंकारी
राजपिता रमित जी ने कहा कि संत समागम की तैयारियों में दिखाई देने वाली सेवा असंख्य
संतों की निस्वार्थ सेवा, त्याग और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन
केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के सुख-दुख में सहभागी बनने के लिए मिला है। सेवा
में जब मैं का भाव समाप्त होकर हम का भाव आता है, तभी सेवा का वास्तविक अर्थ सामने
आता है।
उन्होंने
कहा कि सतगुरु का ज्ञान मनुष्य की सोच बदलकर हर व्यक्ति में निरंकार का स्वरूप देखने
की प्रेरणा देता है। जब इंसान एक-दूसरे से प्रेम और सम्मान के साथ व्यवहार करेगा तो
समाज और सुंदर बनेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने कर्मों और व्यवहार से सच्चा मानव
बनने का आह्वान किया। इस वर्ष
संत समागम का विषय जागृति रखा गया है। इसके माध्यम से मनुष्य को बाहरी संसार के प्रभाव
से हटकर अपने भीतर झांकने और अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा दी जाएगी।
जागृति का अर्थ हर समय सजग और सचेत रहना तथा परिस्थितियों के बीच प्रभु-स्मरण से जुड़े
रहना बताया गया। संत निरंकारी मिशन के अनुसार
समागम किसी धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यहां सेवा के माध्यम से
मानवता और आध्यात्मिकता को जोड़ने का संदेश दिया जाता है। समागम में सेवा के लिए बड़ी
संख्या में श्रद्धालु जुटेंगे और विभिन्न व्यवस्थाओं में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।