वाराणसी,13 अगस्त । उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में हर घर तिरंगा अभियान-2026 के अंतर्गत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के तत्वावधान में निकली तिरंगा रैली का कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस दौरान कुलपति प्रो.चतुर्वेदी स्वयं भी तिरंगा लेकर विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों के साथ तिरंगा रैली में शामिल हुए। परिसर स्थित मालवीय भवन प्रांगण से प्रारंभ हुई यह रैली डीएसडब्ल्यू चौराहा होते हुए, वाणिज्य संकाय से होकर एम्फीथिएटर मैदान पर संपन्न हुई। रैली में एनएसएस स्वयंसेवकों तथा विद्यार्थियों ने हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारों के साथ उत्साहपूर्वक प्रतिभागिता की। रैली का उद्देश्य देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता एवं तिरंगे के प्रति सम्मान की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है। इस अवसर पर कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल किसी एक संस्था, कार्यालय या घर तक सीमित उत्सव नहीं है, बल्कि यह पूरे देश का राष्ट्रीय पर्व है। देशभर में लोग एक साथ इस पर्व को उत्साह और गौरव के साथ मनाते हैं। विश्वविद्यालय में भी विद्यार्थी पूरे उत्साह और उमंग के साथ स्वतंत्रता दिवस से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का तिरंगा हमारी राष्ट्रीय पहचान, अस्मिता और गौरव का प्रतीक है। दुनिया के किसी भी कोने में तिरंगे को देखते ही भारतीय होने का भाव जागृत होता है। यह तिरंगा देशवासियों को एक सूत्र में बांधता है। प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि तिरंगे की शान और देश की स्वतंत्रता के लिए असंख्य वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया। यह उत्सव उनके त्याग और बलिदान को स्मरण करते हुए प्रेरणा लेने का भी अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रीय पर्व से जुड़ी गतिविधियों में उत्साहपूर्वक सहभागिता की सराहना की।
कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया और कहा कि युवा पीढ़ी की प्रतिभागिता प्रेरणादायक है। छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह ने कहा कि कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थी स्वयंसेवक देश के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला हैं। वे 2047 के विकसित भारत के ध्वजवाहक हैं, आने वाले 50 वर्षों में देश के निर्माण और विकास में युवा पीढ़ी की भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण होगी। राष्ट्र के भविष्य को दिशा देने और देश की प्रगति में योगदान देने की जिम्मेदारी युवाओ के कंधों पर है। राष्ट्रीय सेवा योजना, बीएचयू की समन्वयक डॉ. स्वप्ना मीना ने कहा कि प्रत्येक युवा को कम से कम दो स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी अवश्य पढ़नी चाहिए, ताकि उनके संघर्ष, त्याग और समर्पण से प्रेरणा लेकर वर्तमान को बेहतर बनाया जा सके। विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद के महासचिव प्रो. अनुपम नेमा ने कहा कि युवाओं को एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।