सतना, 30 अगस्त । मध्य प्रदेश के सतना जिले की धार्मिक नगरी चित्रकूट में लगातार हुई बारिश के बाद हालात बिगड़ने पर बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। घरों और होटलों की छतों पर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए सेना के दो हेलीकॉप्टर रेस्क्यू में लगाए गए। इस दौरान करीब 650 लोगों को रेस्क्यू कर राहत शिविरों में पहुंचाया गया।
चित्रकूट में बाढ़ की स्थिति के मद्देनजर जिला प्रशासन अलर्ट है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव, स्वास्थ्य, पेयजल, विद्युत व्यवस्था तथा क्षतिग्रस्त अधोसंरचना की बहाली के प्रयासों में जुटा हुआ है। सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आगामी कम से कम सात दिनों तक सभी संबंधित टीमों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर द्वारा रविवार को जारी निर्देशानुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय निकायों द्वारा साफ-सफाई कराने तथा संक्रमण की रोकथाम के लिए ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जाएगा। सीएमएचओ एवं बीएमओ द्वारा चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए मोबाइल मेडिकल टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। पेयजल व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए स्थानीय निकायों एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था शीघ्र बहाल की जाएगी। वहीं विद्युत मण्डल कंपनी द्वारा विद्युत आपूर्ति की बहाली के लिए त्वरित कार्रवाई की जाएगी। विशेष रूप से वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, इनटेक वेल एवं अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में बिजली आपूर्ति बहाल करने को प्राथमिकता दी जाएगी।
बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे करने तथा आरबीसी 6/4 के प्रावधानों के तहत मुआवजा प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए राजस्व एवं स्थानीय निकायों की संयुक्त टीमें गठित की जाएंगी। संबंधित एसडीएम गैर-प्रभावित क्षेत्रों के पटवारियों को भी सर्वे कार्य में शामिल करेंगे, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे कार्य शीघ्र पूरा किया जा सके। राहत शिविरों के संचालन एवं प्रभावित लोगों को भोजन के पैकेट उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित एसडीएम द्वारा सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही एनजीओ एवं व्यक्तिगत सहयोग से प्राप्त कपड़े तथा अन्य आवश्यक सामग्री का जरूरतमंद लोगों के बीच वितरण कराया जाएगा। सड़क एवं पुल से संबंधित सभी एजेंसियों को बाढ़ से बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का तत्काल आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। क्षतिग्रस्त मार्गों एवं पुलों पर आवागमन रोकने, आवश्यकतानुसार ट्रैफिक डायवर्जन करने तथा मरम्मत कार्य प्रारंभ करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएंगे। शिक्षा विभाग द्वारा बाढ़ प्रभावित स्कूल परिसरों की स्थिति का निरीक्षण एवं मूल्यांकन कर आवश्यक मरम्मत कार्य सुनिश्चित किए जाएंगे।
जिला संयोजक आदिम जाति एवं सहायक संचालक पिछडा वर्ग द्वारा सभी छात्रावासों का निरीक्षण कर उनकी स्थिति का जायजा लिया जाएगा। डीएसओ, एएसओ, जेएसओ और एसडीएम द्वारा आरबीसी 6/4 के प्रावधानों के अनुसार प्रभावित परिवारों को सूखा राशन उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं उप संचालक पशु चिकित्सा द्वारा फील्ड कर्मचारियों को सक्रिय कर प्रभावित क्षेत्रों में पशुधन से संबंधित आवश्यक सेवाएं सुनिश्चित की जाएंगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संबंधित एसडीएम अपने-अपने सब-डिविजन में राहत एवं पुनर्वास कार्यों का नेतृत्व करेंगे। वे संबंधित जिला अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखते हुए आवश्यकतानुसार अतिरिक्त टीमें एवं संसाधन जुटाएंगे। किसी भी प्रकार के अतिरिक्त सहयोग अथवा जिला स्तर पर समन्वय की आवश्यकता होने पर एसडीएम द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों, जिला पंचायत सीईओ एवं अपर कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों को तत्काल अवगत कराया जाएगा।
गौरतलब है कि सतना में जिले में शुक्रवार की रात से शनिवार तक लगातार 14 घंटे हुई बारिश से मंदाकिनी उफान पर आ गई। लगभग 42 साल पुराना, 25 फीट ऊंचा और 300 मीटर चौड़ा नदी का बड़ा पुल भी तेज बहाव में बह गया। इससे नदी का पानी घाटों से निकलकर बस्तियों, बाजारों और घरों तक पहुंच गया। कई इलाकों में दो मंजिला मकान तक पानी में डूब गए। मंदाकिनी का पानी घरों में घुसा तो लोग जरूरी सामान लेकर छतों पर पहुंच गए।
कई परिवारों के सामने बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित रखने की चुनौती थी। नीचे घरों में पानी बढ़ता रहा और ऊपर छतों पर बैठे परिवार मदद की राह देखते रहे। कहीं सड़क पर नाव चलती नजर आई तो कहीं लोग अपने घरों और होटलों की छतों पर बैठकर मदद का इंतजार करते रहे।
हालात बिगड़ने पर शनिवार को बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। सेना के दो हेलीकॉप्टर रेस्क्यू में लगाए गए। घरों और होटलों की छतों पर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की गई। वहीं एसडीआरएफ की टीम ने मोटरबोट के जरिए बाढ़ के पानी के बीच पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। बाढ़ के बीच बिजली व्यवस्था भी ठप हो गई। पूरे क्षेत्र में करीब 20 घंटे तक ब्लैकआउट रहा। चारों तरफ पानी और ऊपर से घना अंधेरा। ऐसे में छतों पर फंसे परिवारों के लिए समय गुजारना मुश्किल हो गया।
अब बाढ़ का पानी उतरने के बाद तबाही का असली मंजर सामने आएगा। घरों में रखा राशन, कपड़े, बिस्तर, फर्नीचर और घरेलू सामान पानी में खराब हो गया। कई परिवारों के लिए यह सिर्फ जलभराव नहीं, बल्कि उनकी बरसों की मेहनत के उजड़ जाने जैसा है।