इलेक्ट्रोपैथी पूरी तरह से पौधों के रस पर आधारित हर्बल चिकित्सा पद्धति : राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े

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जयपुर, 02 अक्टूबर । महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री जयंती के पावन अवसर पर जयपुर स्थित महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज में “इलेक्ट्रोपैथी अनुसंधान में डेटा का महत्व एवं भूमिका” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा और मुख्य वक्ता हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय सचिव संजय राय उपस्थित रहे।

संगोष्ठी के दौरान राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने अपने संबोधन में कहा कि अनुसंधान और डेटा पर केंद्रित यह संगोष्ठी एक अत्यंत सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आयुर्वेद, योग और आयुष प्रणालियों ने चिकित्सा क्षेत्र में स्थान बनाया है, उसी प्रकार इलेक्ट्रोपैथी भी जन-स्वास्थ्य के लिए बेहद प्रभावी सिद्ध हो रही है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि आयुर्वेद में पौधे के सभी अंगों (जड़, छाल, पत्ते) और होम्योपैथी में अंशों का उपयोग होता है, जबकि इलेक्ट्रोपैथी पूरी तरह से पौधों के रस पर आधारित हर्बल चिकित्सा पद्धति है। उन्होंने 2018 में राज्य सरकार द्वारा इलेक्ट्रोपैथी को दी गई कानूनी मान्यता और एक्ट का भी विशेष उल्लेख किया।

मुख्य वक्ता और हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय सचिव संजय राय ने बापू के विचारों और एकादश व्रतों के दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी केवल उपदेशक नहीं बल्कि एक ‘प्रैक्टिशनर’ थे, जिन्होंने सत्य और अहिंसा का प्रयोग सार्वजनिक जीवन में किया। उन्होंने इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सकों को प्रेरित करते हुए कहा कि किसी भी चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर अनुसंधान, डेटा और साक्ष्यों के आधार पर नए प्रयोग करना आवश्यक है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के आदर्शों को याद करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने इलेक्ट्रोपैथी की सरलता और साइड-इफेक्ट रहित प्रकृति की तुलना सात्विक जीवनशैली से की। साथ ही उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम, काशी विद्यापीठ से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों और शास्त्री की सादगी का भावुक वर्णन करते हुए सभी को राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।

इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हेमंत सेठिया ने संगोष्ठी की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए राज्य में इस पद्धति के ऐतिहासिक संघर्ष को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि दांडी यात्रा की तर्ज पर यात्राएं निकालने, धरना प्रदर्शनों और घर-घर तुलसी वितरण जैसे अभियानों के फलस्वरूप ही 2018 में इलेक्ट्रोपैथी को कानूनी मान्यता मिली। सेठिया ने कहा कि इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रोपैथी में साइंटिफिक रिसर्च, क्लिनिकल डेटा के संकलन और फार्माकोपिया के विकास को गति देना है। उन्होंने राज्यभर से आए चिकित्सकों का स्वागत करते हुए आह्वान किया कि सभी प्रामाणिक डेटा जुटाकर इस पद्धति को वैश्विक मंच पर स्थापित करें।

संस्थान के विशेषाधिकारी डॉ. हरबीर सिंह ने सभी अतिथियों का संस्थान परिसर में स्वागत किया। उन्होंने महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज की स्थापना, 13 प्रमुख चेयर (विभागों) के गठन और संस्थान की भावी शैक्षणिक दिशा पर संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत की।

इस मुख्य सत्र के पश्चात दो विशेष तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में एमएनआईटी के प्रोफेसर संगीत पिल्लई ने पीपीटी के माध्यम से इलेक्ट्रोपैथी अनुसंधान में प्रामाणिक डेटा के महत्व और उसके विश्लेषण की तकनीकों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

द्वितीय तकनीकी सत्र में राजस्थान विश्वविद्यालय की प्रोफेसर बिंदु शर्मा ने इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा प्रणाली के अंतर्गत वैज्ञानिक शोध पत्रों के प्रकाशन के अवसरों, अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स के मानकों और रिसर्च पेपर लेखन की प्रक्रिया पर पीपीटी प्रस्तुत की।

इस संगोष्ठी में राजस्थान भर से आए सैकड़ों इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया तथा इलेक्ट्रोपैथी को शोध आधारित पद्धति के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया।