बिना समीक्षा संस्थान बंद करना प्रतिशोध की राजनीति : जयराम ठाकुर

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शिमला, 01 सितंबर । पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मंगलवार को विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सत्ता संभालते ही बिना मंत्रिमंडल के गठन और बिना किसी समीक्षा के प्रदेश में बड़े पैमाने पर संस्थानों को बंद करने का अभियान शुरू कर दिया। उन्होंने इसे प्रतिशोध की राजनीति करार देते हुए कहा कि सरकार ने अब तक हजारों संस्थानों को बंद किया है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री अब संस्थानों को बंद करने के पीछे ‘नीड बेस्ड असेसमेंट’ का तर्क दे रहे हैं, लेकिन सत्ता संभालने के अगले ही दिन एक हजार से अधिक संस्थानों को बंद करने के लिए कौन-सा सर्वे किया गया था, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाद में सरकार ने इनमें से 123 संस्थानों को दोबारा खोल दिया, जिससे उसके फैसलों पर सवाल खड़े होते हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री कई स्कूलों को इसलिए बंद करने का तर्क देते हैं क्योंकि वहां केवल एक शिक्षक तैनात था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शिक्षकों की कमी थी तो सरकार को रिक्त पद भरने चाहिए थे। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में जेबीटी और टीजीटी के करीब छह हजार पद रिक्त हैं, जबकि 3214 स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक तैनात है। उनके अनुसार, शिक्षकों की कमी के कारण छात्र संख्या घटती है और बाद में सरकार उसी आधार पर संस्थान को बंद कर देती है।

जयराम ठाकुर ने कर्मचारी और पेंशनर मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में कर्मचारी हितैषी है तो कर्मचारी और पेंशनर धरने पर क्यों बैठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के चार वर्ष पूरे होने को हैं, लेकिन कर्मचारियों के भत्ते और अन्य देय राशि अभी भी लंबित हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री के कांग्रेस के धरना-प्रदर्शनों में शामिल होने पर भी सवाल उठाया और कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी की राजनीतिक असफलताओं का उल्लेख किया।

जयराम ठाकुर ने कहा कि जनता सरकार के कार्यों और फैसलों को देख रही है तथा राजनीतिक बयानबाजी से अब वास्तविक मुद्दों से ध्यान नहीं भटकाया जा सकता।