प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करता है।
उन्होंने
कहा कि राज्य में 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की ग्राउंड
ब्रेकिंग की गई। साथ ही अन्य एमओयू की ग्राउंड ब्रेकिंग की दिशा में तेजी से
कार्य किया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 40 नए औद्योगिक क्षेत्र
विकसित किए गए हैं तथा औसतन प्रत्येक तीन सप्ताह में एक नया औद्योगिक पार्क
विकसित किया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग छह औद्योगिक भूखंडों का आवंटन किया
जा रहा है, जिससे निवेशकों को शीघ्र भूमि उपलब्ध हो रही है।
उन्होंने
कहा कि राज्य सरकार ने 30 से अधिक सेक्टर-विशिष्ट नीतियां लागू कर
उद्योगों के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया है। राजस्थान निवेश
प्रोत्साहन योजना-2024 के माध्यम से निवेशकों को राज्य करों की
प्रतिपूर्ति, पूंजीगत अनुदान तथा अन्य आकर्षक प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जा
रहे हैं, जिससे राज्य में निवेश और अधिक प्रतिस्पर्धी बना है। मुख्य
सचिव ने निवेशकों को निजी औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति-2026 के अंतर्गत
उपलब्ध अवसरों की जानकारी देते हुए बताया कि पीपीपी मॉडल के तहत निजी
क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी से आधुनिक औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे
हैं।
उन्होंने पात्र निवेशकों से 31 जुलाई 2026 तक आवेदन करने को कहा। उन्होंने
कहा कि राज्य सरकार ने सुगम एवं डि-रेगुलेशन सुधारों के माध्यम से
उद्योगों के लिए अनुमतियों की प्रक्रिया को अत्यंत सरल बनाया है। सिंगल
विंडो सिस्टम के जरिए 190 सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं, लैंड यूज चेंज
की समय-सीमा 30 दिन कर दी गई है, एमएसएमई स्वीकृतियों में तेजी लाई गई है
तथा 24×7 औद्योगिक एवं व्यावसायिक संचालन जैसी अनेक सुधारात्मक पहलें लागू
की गई हैं।
मुख्य सचिव ने पीएएफआई के
प्रतिनिधियों को दिसम्बर 2026 में आयोजित होने वाले प्रवासी राजस्थानी दिवस
तथा जयपुर एवं उदयपुर में प्रस्तावित रिवर्स बायर-सेलर मीट में सक्रिय
सहभागिता के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि इन आयोजनों से वैश्विक निवेशकों
एवं राजस्थान के उद्योग जगत के बीच नए व्यापारिक अवसर विकसित होंगे।
बैठक
में अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं राजकीय
उपक्रम तथा रीको के अध्यक्ष श्री शिखर अग्रवाल ने राज्य की औद्योगिक
उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार की निवेशक-अनुकूल
नीतियों, रीको द्वारा विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना, संयुक्त उपक्रमों
एवं साझेदारी आधारित विकास मॉडल तथा निर्यात प्रोत्साहन पहलों से राजस्थान
देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
उन्होंने बताया कि विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए 3,200 करोड़
रुपए की स्वीकृतियां प्रदान की गई हैं तथा उद्योगों की आवश्यकताओं के
अनुरूप नीतिगत सुधार निरंतर किए जा रहे हैं। आयोजना,
आयोजना जनशक्ति और गजेटियर्स एवं सांख्यिकी विभाग के शासन सचिव रवि
कुमार सुरपुर ने राज्य की स्टार्टअप नीति, डाटा सेंटर नीति, इनोवेशन हब
तथा हब एंड स्पोक मॉडल सहित युवाओं को नवाचार एवं उद्यमिता से जोड़ने के
लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार
स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर युवाओं के लिए नए रोजगार एवं
उद्यमिता के अवसर सृजित कर रही है। बैठक के दौरान
पीएएफआई एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी राज्य में निवेश को और अधिक
प्रोत्साहित करने संबंधी विभिन्न सुझाव दिए, जिन पर मुख्य सचिव ने
सकारात्मक विचार करते हुए समयबद्ध कार्यवाही का आश्वासन दिया। इस अवसर पर उद्योग एवं वाणिज्य, रीको, आयोजना सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, पीएएफआई के पदाधिकारी तथा सदस्य उपस्थित रहे।